सुनो कान्हा !!

सुनो कान्हा !!

मेरे सुमन की
 एक ही #अभिलाषा
अब तो जानो
 मेरे प्रीत की #भाषा!

असुवन तेल में डुबो
कजरे की बनाई बाती 
नैनन के दीप जलाए
#पलकें टिम टिम जाती!

आस धरूं अनिमेष
सांस है अभी शेष
आना तूं ज्यों मोती सीप
देखो! बुझ न जाय दीप!!
#भारती_बिंदु
#सरस

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