स्त्री बनाम पुरुष 🙏
स्त्री कौन है ??
अंत: मुखी
प्रयासरत बहिर्मुखी !!
बहुमुखी
प्रशंसा पर
बन मोम पिघल गयी !!
अश्रु के गर्म स्रोत
कुछ दुख स्याह से
कुछ निगाह से
बह गयी बह गयी !!!
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पुरुष कौन है ??
अंत: मुखी
विवशता वश बहिर्मुखी !!
बहुमुखी
कर्तव्य पथ पर
बन पाषाण ढल गया !!
हर्ष के नर्म ओट
कुछ सुख आगाह से
कुछ प्रवाह से
रह गया रह गया !!
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डा भारती झा
कांटी मुजफ्फरपुर

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