स्त्री बनाम पुरुष 🙏




स्त्री कौन है ?? 

अंत: मुखी 

प्रयासरत बहिर्मुखी !!


बहुमुखी 

प्रशंसा पर 

बन मोम पिघल गयी !!


अश्रु के गर्म स्रोत 

कुछ दुख स्याह से 

कुछ निगाह से 

बह गयी बह गयी !!! 

*************


पुरुष कौन है ?? 


अंत: मुखी 

विवशता वश बहिर्मुखी !!


बहुमुखी 

कर्तव्य पथ पर 

बन पाषाण ढल गया !!


हर्ष के नर्म ओट 

कुछ सुख आगाह से 

कुछ प्रवाह से 

रह गया रह गया !! 

************


डा भारती झा

कांटी मुजफ्फरपुर







 

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