तृण या स्त्री
तृण या स्त्री ?? हम तो बस हैं एक तृण!! व्यर्थ समझ हमे न उखाड़ ! पशु के हम हैं बिछौना व चारा क्यों समझ रहे बेकार बिचारा ! हम ही निर्धन के अनमोल धन हम से मिलेआप्त सुलभ ईंधन ! हम ही तो डूबते के है सहारा हम संगठित बांधे छप्पर सारा! हम ही सीता मैया के थे रक्षक डरा कैसे लंकेश रावण भक्षक ! हम में शक्ति आ भक्ति चरम है जो समझे तुच्छ उसका भरम है !! डा भारती झा