बेटी!!
बेटी !!
वृष्टि प्रथम बूँद सा निर्मल
मीन समान सुनयन सजल!
सृष्टि सृजित सुमन सुकर
नव कुसुमित रक्तिम अधर!
इह लौकिक पारलौकिक सुख
नृत्य नित्य करती सहज सगर !
कोर अवतरित यदा सुकन्या
हुई जननी संग कुटुम्ब धन्या!
नृत्यति सुरभित सकला मही
प्रभु तव नत शीश पितामही !
#भारतीबिंदु

दादी की गोदी में पोती
ReplyDeleteजैसे सीप के अंदर मोती 😍👍
Very nice Kavita 👌👌
ReplyDeleteधन्यवाद
Delete😍😍
ReplyDeleteमूल से सूद प्यारा।
ReplyDeleteपोती दादी- दादाके,
आंखो का तारा। 😍😍🥰😘❤️❤️
बिल्कुल सही कहा !!
DeleteBeautiful 👏👏👍👌👌💐💐
ReplyDeleteProud to be a DAUGHTER...
ReplyDeleteYes indeed
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