दर्पण
दर्पण
उसने देखा इक छोटा-सा दर्पणकिया स्वयं को संपूर्ण समर्पण !!
दिखा उसे उसमें अपना ही रूप
सुन्दर सुधर सशक्त स्वस्थ स्वरूप !!
दिखाई दे गया अपना वोअनुभव
जो कमाया व गवाया हर सम्भव !!
चेहरे की रेखाएं उम्र बता रही थी
न चाहते हुए उसको सता रही थी !!
किन्तु यह क्या?दिख रहा ये कौन?
जानता है !!फिर क्योंकर है मौन!!
कदापि नहीं उसका यह वहम है
जो दिख रहा वो उसका अहं है !!
रक्त नेत्र मध्य सख्त क्रूर कुरूप
और कोई नहीं वही अहं प्रतिरूप!!
त्वरित ही मुख कुटिल स्मित की रेखा
आई गई और उसने सहज ही देखा!!
सौंदर्य पद प्रतिष्ठा अर्थ गर्व से युक्त
सहज स्नेह संस्कार सभ्यता से मुक्त!!
दिव्य दर्प युक्त विराट भाल प्रत्यर्पण
परिभाषित हुआ आज नाम "दर्पण"!!
डाo भारती झा
मुजफ्फरपुर बिहार
क्यूंकि दर्पण कभी झूठ हानिन बोलता है, बस व्यक्ति के अंतरमन को ही दिखलाता है।।
ReplyDeleteबहुत सुंदर रचना 💐👌
ReplyDeleteधन्यवाद 🙏
Deleteबहुत सुंदर प्रस्तुति...
ReplyDeleteसराहना हेतु धन्यवाद 🙏
Deleteबहुत सुन्दर परस्तुति
ReplyDelete🙏🙏
DeleteVery very nice creation🙏🙏
ReplyDeleteबहुत सुंदर..अप्रतिम लेखन
ReplyDeleteधन्यवाद अर्पिता
Deleteकिसी से कोई जब गिला रखना
ReplyDeleteसामने ख़ुद के भी आईना रखना।
एक शायर की बात सच ही तो है।
बहुत अच्छी कविता।
जी धन्यवाद 🙏
Deleteवाह स्वयं सऽ अपना आप के परिचित कराबैय के बहुत सुन्दर वर्णन👌👌👏👏🙏🙏❤️❤️
ReplyDeleteजी धन्यवाद ,🙏
Deleteअति उत्तम .. बरबस ग़ालिब का शेर याद आता है… धूल चेहरे पर थी उम्र भर आईना साफ़ करता रहा …
ReplyDeleteआपकी लेखनी में सशक्त अभिव्यक्ति आप कीं अद्वितीय शैली की परिचायक है।..💐🙏👌👏👍🏻💐
👌👌👏👏🙏🙏💐💐
धन्यवाद हृदय से मैडम 🙏
DeleteBahut sundar
ReplyDelete🙏🙏
DeleteBahut sundar or sahi anubhuti 👏👏👏👍🙏🙏😊
ReplyDeleteजी धन्यवाद सराहना हेतु 🙏
DeleteHi Dr Bharti,
ReplyDeleteI have been following you for last few weeks. I feel great that I did so. I found you a wonderful poet and a very strong feminist. Thanks for being a source of inspiration. Great work... Kudos....
It's my pleasure!!
DeleteYour kind words keep me up !!👍
Thanx 🙏